कार्तिक मास (kartik month)का महत्व तथा  पूजन

कार्तिक मास (kartik month) का महत्व तथा पूजन

October 26, 2024Cycle Care

हिन्दू धर्म में कार्तिक का महीना (kartik month) बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। यह चातुर्मास का अंतिम मास माना जाता है । पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु चार माह के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं। जिसमें हिन्दू धर्म के लोग कोई भी शुभ कार्य नहीं करते हैं। यह मास उनकी जागृति का होता है इसलिए यह मास अत्यन्त शुभ माना जाता है।

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार, यह मास आश्विन माह की पूर्णिमा से शुरु होता है और कार्तिक पूर्णिमा तक चलता है। इसलिए इस माह में भगवान विष्णु की उपासना का बहुत महत्व है। और कार्तिक पूर्णिमा की कथा सुनना भी आवश्यक होता है । यह मास बहुत ही धार्मिकता से भरा हुआ होता है।

जिस दिन भगवान विष्णु नींद से जागृत होते हैं उस दिन को देवोत्थान एकादशी के नाम से जाना जाता है।

तुलसी पूजा 

इस माह में तुलसी जी की विषेश पूजा की जाती है। इसी माह में तुलसी जी विवाह भगवान विष्णु जी के साथ रचाने की परंपरा है। 

तुलसी जी, माता लक्ष्मी जी का ही प्रतीक हैं। पूरे मास में तुलसी जी के चौरे के आगे प्रत्येक शाम को घी का दीपक जलाना चाहिए। हिन्दू धर्म में प्रत्येक घर में इसीलिए तुलसी जी का पौधा बहुत ही पूज्यनीय माना जाता है। 

तुलसी जी के पौधे में ज्यादा से ज्यादा ऑक्सीजन प्रदान करने की क्षमता है। तुलसी जी के पौधे से वायु प्रदूषण दूर हो जाता है।

स्नान ध्यान करके माता तुलसी के जड़ों में भी गंगा जल समर्पित करना चाहिए और शाम के समय दीपदान करना चाहिए।

दामोदर मास 

इस माह को दामोदर मास के नाम से भी जाना जाता है जो कि भगवान विष्णु का ही एक नाम है। अतः भगवान विष्णु जी के साथ ही साथ मां लक्ष्मी जी की भी पूजा करते हैं।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस माह में भगवान् शिव और भगवान विष्णु दोनों ही धरती पर प्रकट होते हैं अतः धूमधाम से उनकी पूजा करनी चाहिए।

गंगा नदी में स्नान 

कार्तिक मास (kartik month) में गंगा नदी में स्नान का बहुत ही महत्व है। ऐसा मानते हैं कि गंगा नदी में स्नान करने से सारे पाप धुल जाते हैं और मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है। आत्मा की शुद्धता और अध्यात्मिक उन्नति के लिए भी यह मास अत्यन्त महत्वपूर्ण है। 

दीपों का त्यौहार

कार्तिक मास (kartik month) में ही दीपावली पर्व पड़ता है। इसे प्रकाश पर्व भी कहा जाता है। इसे दीपों का त्यौहार भी कहते हैं। इस प्रकार से त्योहारों के समय सामाजिक मेल मिलाप भी होता है। भाईचारा और सौहार्द्र बढ़ता है।

घोर अमावस की रात में भी सारा गांव व शहर दीपों की रोशनी से झिलमिला उठता है। इनसे सभी नकरात्मक ऊर्जाओं का नाश होता है। इस काल में अनेकों प्रकार के कीड़े मकोड़ों का भी प्रकोप होता है जो दीपों की अग्नि में नष्ट हो जाते हैं। पूरा वातावरण प्रदूषण से मुक्त हो जाता है। 

कार्तिक मास (kartik month) समापन

कार्तिक मास (kartik month) के समापन के दिन प्रकाश पर्व मनाया जाता है। इस दिन कार्तिक पूर्णिमा होती है और इसे "देव दीपावली " के नाम से भी जाना जाता है।

कहते हैं कि इस दिन भगवान शिव ने एक राक्षस का संहार किया था जिसका नाम त्रिपुरासुर था इसलिए कार्तिक पूर्णिमा के दिन को " त्रिपुर पूर्णिमा" के नाम से भी जाना जाता है। इसलिए भगवान शिव की इस दिन आराधना की जाती है।

इस माह में लोग दलहन कम खाते हैं। बहुत ही संतुलित और संयमित भोजन करते हैं। संयम जीवन जीते हैं। शरीर में तेल कम लगाते हैं या नहीं भी लगाते हैं।

 नर्क चतुर्दशी के दिन अवश्य तेल लगाना चाहिए।

इस प्रकार कार्तिक मास (kartik month) बहुत ही आध्यात्मिक अनुष्ठानों से भरा हुआ माह माना जाता है। जिनको भी मोक्ष प्राप्ति की चाह होती है वे इस माह को अपने आध्यात्मिक उत्थान का माह मानते हैं। पूरे माह गंगा स्नान, दीपदान और अर्थदान देकर मनुष्य सभी पापों से मुक्त होकर मुक्ति पथ पर बढ़ जाता है।