भारत वर्ष में नवरात्रि के नौ दिनों में क्या क्या आयोजन चलते रहते हैं

नवरात्रि के नौ दिन: भारत भर में मनाया जाने वाला शक्ति का महापर्व

October 3, 2024Cycle Care

शारदीय नवरात्रि (Shardiya Navratri) 2026 में रविवार, 11 अक्टूबर से शुरू होकर सोमवार, 19 अक्टूबर तक चलेगी। अगले दिन, मंगलवार 20 अक्टूबर को विजयादशमी (दशहरा) मनाई जाएगी। नौ दिनों में देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा होती है। उत्तर भारत में रामलीला, गुजरात में गरबा-डांडिया, बंगाल में दुर्गा पूजा और दक्षिण भारत में गोलू व दशहरा के रूप में यह पर्व मनाया जाता है।

Navratri भारत के सबसे बड़े त्योहारों में से एक है। यह शब्द दो हिस्सों से मिलकर बना है, "नव" यानी नौ और "रात्रि" यानी रात। इसलिए नवरात्रि का सीधा मतलब है नौ रातों का पर्व। साल में यह त्योहार अलग-अलग रूपों में कई बार आता है, लेकिन सबसे भव्य रूप से मनाई जाने वाली नवरात्रि को शारदीय नवरात्रि कहा जाता है। यह अश्विन महीने में आती है और पूरे भारत में अलग-अलग तरीकों से मनाई जाती है। किसी राज्य में यह रामलीला और दशहरे का त्योहार है, तो कहीं गरबा और डांडिया की रातों का, कहीं दुर्गा पूजा के पंडालों का, तो कहीं गोलू की गुड़ियों का।

नवरात्रि क्यों मनाई जाती है?

नवरात्रि की कथा देवी दुर्गा और असुर महिषासुर के युद्ध से जुड़ी है। मार्कण्डेय पुराण और देवी भागवत पुराण में इसका वर्णन मिलता है। कथा के अनुसार महिषासुर नाम के एक शक्तिशाली असुर ने अपनी तपस्या से ऐसा वरदान पा लिया था कि उसे कोई देवता या पुरुष हरा नहीं सकता था। इस वरदान के बल पर उसने स्वर्ग पर अधिकार कर लिया और देवताओं को परेशान करने लगा। तब सभी देवताओं ने अपनी शक्तियों को मिलाकर देवी दुर्गा को प्रकट किया।

देवी दुर्गा और महिषासुर के बीच नौ दिनों तक भीषण युद्ध चला। महिषासुर बार-बार अपना रूप बदलता रहा, कभी भैंसे का रूप लेता तो कभी सिंह या हाथी का, लेकिन देवी हर बार उस पर भारी पड़ीं। नवमी की रात को देवी दुर्गा ने अपने त्रिशूल से उसका वध कर दिया। इस जीत को अगले दिन विजयादशमी के रूप में मनाया जाने लगा। यही वजह है कि नवरात्रि को बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व माना जाता है।

साल में नवरात्रि कितनी बार आती है?

ज्यादातर लोग नवरात्रि को साल में सिर्फ दो बार आने वाला त्योहार समझते हैं, लेकिन हिंदू पंचांग के अनुसार यह चार बार आती है।

नवरात्रि का प्रकार महीना स्वरूप
चैत्र नवरात्रि चैत्र (मार्च-अप्रैल) सार्वजनिक रूप से मनाई जाती है, अंत में रामनवमी
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि (Gupt Navratri) आषाढ़ (जून-जुलाई) साधकों और तांत्रिक परंपरा से जुड़े लोग मनाते हैं
शारदीय नवरात्रि आश्विन (सितंबर-अक्टूबर) सबसे बड़ी और सार्वजनिक, अंत में विजयादशमी
माघ गुप्त नवरात्रि माघ (जनवरी-फरवरी) दस महाविद्याओं की गुप्त पूजा

चैत्र और शारदीय नवरात्रि आम जनता खुले तौर पर मनाती है। बाकी दो नवरात्रि गुप्त रखी जाती हैं, इसलिए इन्हें गुप्त नवरात्रि कहा जाता है।

नवरात्रि 2026 की तारीख और घटस्थापना मुहूर्त कब है?

शारदीय नवरात्रि 2026 में रविवार, 11 अक्टूबर से शुरू होगी और सोमवार, 19 अक्टूबर तक चलेगी। इसके अगले दिन, मंगलवार 20 अक्टूबर को विजयादशमी (दशहरा) मनाई जाएगी।

पहले दिन घटस्थापना (Ghatasthapana) की जाती है, जिसे कलश स्थापना भी कहा जाता है। यह पूजा प्रतिपदा तिथि में और दिन के पहले हिस्से में करना शुभ माना जाता है।

  • घटस्थापना का दिन: रविवार, 11 अक्टूबर 2026
  • घटस्थापना मुहूर्त: सुबह करीब 6:20 बजे से 10:15 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त (वैकल्पिक समय): सुबह करीब 11:44 बजे से दोपहर 12:32 बजे तक

शहर के हिसाब से इस समय में कुछ मिनट का अंतर आ सकता है, इसलिए अपने शहर के पंचांग से सही समय जरूर देख लें।

नवरात्रि के नौ दिनों में किन नौ देवियों की पूजा होती है?

नवरात्रि के नौ दिनों में देवी दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है, जिन्हें नवदुर्गा (Navadurga) कहा जाता है। हर दिन का एक तय रंग भी होता है, जिसे व्रत रखने वाले और गरबा खेलने वाले लोग अपने कपड़ों में इस्तेमाल करते हैं।

दिन तारीख (2026) देवी का स्वरूप रंग
पहला दिन 11 अक्टूबर, रविवार माँ शैलपुत्री (घटस्थापना) नारंगी
दूसरा दिन 12 अक्टूबर, सोमवार माँ ब्रह्मचारिणी सफेद
तीसरा दिन 13 अक्टूबर, मंगलवार माँ चंद्रघंटा लाल
चौथा दिन 14 अक्टूबर, बुधवार माँ कूष्मांडा रॉयल ब्लू
पांचवां दिन 15 अक्टूबर, गुरुवार माँ स्कंदमाता पीला
छठा दिन 16 अक्टूबर, शुक्रवार माँ कात्यायनी (बंगाल में दुर्गा पूजा की शुरुआत) हरा
सातवां दिन 17-18 अक्टूबर माँ कालरात्रि (महासप्तमी) स्लेटी
आठवां व नौवां दिन 19 अक्टूबर, सोमवार माँ महागौरी और माँ सिद्धिदात्री (दुर्गाष्टमी व महानवमी साथ, संधि पूजा सुबह 10:27 से 11:15 बजे तक) बैंगनी और मोरपंखी हरा
दसवां दिन 20 अक्टूबर, मंगलवार विजयादशमी, दुर्गा विसर्जन —

इस साल सप्तमी तिथि दो दिन तक रहने की वजह से दुर्गाष्टमी और महानवमी लगभग एक साथ, यानी 19 अक्टूबर को पड़ रही हैं। इसलिए संधि पूजा (Sandhi Puja) और कन्या पूजन का सही समय अपने शहर के पंचांग या पुरोहित जी से जरूर पूछ लें।

इन नौ दिनों को तीन-तीन दिनों के तीन हिस्सों में भी देखा जाता है। पहले तीन दिन देवी दुर्गा के रौद्र रूप की पूजा होती है, जो बुरी आदतों और नकारात्मकता को खत्म करने का प्रतीक है। अगले तीन दिन देवी लक्ष्मी को समर्पित होते हैं, जो सुख-समृद्धि देती हैं। आखिरी तीन दिन देवी सरस्वती की पूजा के लिए होते हैं, जो ज्ञान और बुद्धि की देवी हैं।

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घटस्थापना कैसे करें और पूजा सामग्री में क्या-क्या चाहिए?

घटस्थापना नवरात्रि की पूजा का सबसे पहला और जरूरी हिस्सा है। इसमें मिट्टी के बर्तन में जौ बोए जाते हैं और उसके ऊपर पानी या गंगाजल से भरा कलश रखा जाता है। कलश के ऊपर आम के पत्ते और नारियल रखा जाता है, और उसे लाल कपड़े या चुनरी से लपेटा जाता है। कलश को रखने के लिए साफ जगह पर लकड़ी की पूजा चौकी का इस्तेमाल किया जा सकता है।

पूजा सामग्री (Puja Samagri) पहले से जुटा लेना अच्छा रहता है, ताकि पूजा के दिन भागदौड़ न करनी पड़े। नौ दिनों की पूजा के लिए आमतौर पर इन चीजों की जरूरत होती है:

जिनके पास यह सब सामान अलग-अलग जुटाने का समय नहीं है, वे संपूर्ण दुर्गा पूजा किट या किताब के साथ आने वाला नवरात्रि पूजा पैक जैसे तैयार सेट देख सकते हैं, जिनमें पूजा की ज्यादातर जरूरी चीजें एक साथ मिल जाती हैं।

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नवरात्रि व्रत क्यों रखा जाता है और इसके सामान्य नियम क्या हैं?

शारदीय नवरात्रि उस समय आती है जब मौसम बरसात से सर्दी की ओर बदल रहा होता है। पारंपरिक मान्यता है कि इस मौसम बदलाव के दौरान हल्का और सात्विक भोजन शरीर के पाचन तंत्र को आराम देता है। यही एक वजह मानी जाती है कि व्रत और सात्विक खान-पान को नवरात्रि से जोड़ा गया।

नवरात्रि में बहुत से लोग नौ दिनों का व्रत रखते हैं, जबकि कुछ लोग सिर्फ पहले और आखिरी दिन का व्रत रखते हैं। व्रत के दौरान अनाज, प्याज और लहसुन से परहेज किया जाता है। इसकी जगह फल, दूध-दही, कुट्टू और सिंघाड़े के आटे से बनी चीजें, साबूदाना और सेंधा नमक का इस्तेमाल होता है। किसी भी सेहत से जुड़ी समस्या में सख्त व्रत शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर रहता है।

उत्तर भारत में नवरात्रि: रामलीला और दशहरे की परंपरा

उत्तर भारत में नवरात्रि को भगवान राम की रावण पर जीत के तौर पर देखा जाता है। इन नौ दिनों में जगह-जगह रामलीला (Ramlila) का मंचन होता है, जिसमें भगवान राम के जीवन की कहानी दिखाई जाती है। विजयादशमी के दिन रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाकर दशहरा (Dussehra) मनाया जाता है। उत्तर भारत में कन्या पूजन (Kanya Pujan) का रिवाज बहुत प्रचलित है, और नवरात्रि के दौरान उपहार देने की परंपरा भी देखी जाती है।

पश्चिम भारत में गरबा और डांडिया का क्या महत्व है?

पश्चिम भारत में, खासकर गुजरात में, नवरात्रि की पहचान गरबा (Garba) और डांडिया (Dandiya) रास से है। गरबा शब्द "गर्भ" से बना है। इसमें महिलाएं दीपक जलाए हुए एक घड़े के चारों ओर गोल घेरे में नाचती हैं, जो गर्भ के भीतर जीवन के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। डांडिया में पुरुष, महिलाएं और बच्चे हाथों में सजी हुई छोटी बांस की डंडियां लेकर जोड़ों में नाचते हैं। इन डंडियों के सिरे पर घुंघरू बंधे होते हैं, जो टकराने पर आवाज करते हैं। नृत्य धीमी गति से शुरू होकर धीरे-धीरे तेज होता जाता है।

पूर्वी भारत में दुर्गा पूजा कैसे मनाई जाती है?

पश्चिम बंगाल, असम और पूर्वोत्तर भारत में शारदीय नवरात्रि के आखिरी पांच दिन दुर्गा पूजा (Durga Puja) के रूप में मनाए जाते हैं। 2026 में यह पांच दिन 16 से 20 अक्टूबर के बीच पड़ेंगे। जगह-जगह पंडाल बनाकर देवी दुर्गा की आदमकद मिट्टी की मूर्तियां स्थापित की जाती हैं, जिनमें देवी को सिंह पर सवार और हाथों में अलग-अलग हथियार लिए दिखाया जाता है। सिंह इच्छाशक्ति का प्रतीक है, जबकि हथियार मन की नकारात्मकता को खत्म करने के लिए जरूरी ध्यान और गंभीरता को दर्शाते हैं। पांच दिनों की पूजा के बाद, दसवें दिन इन मूर्तियों को नदी या तालाब में विसर्जित किया जाता है और महिलाएं एक-दूसरे को कुमकुम लगाकर सिंदूर खेला मनाती हैं।

दक्षिण भारत में नवरात्रि और दशहरा उत्सव की क्या खासियत है?

दक्षिण भारत में नवरात्रि के दौरान घरों में गोलू (Golu) या कोलू सजाने की परंपरा है, जिसमें तरह-तरह की गुड़िया और मूर्तियां गुड़िया स्टैंड पर सजाई जाती हैं और पड़ोसियों तथा रिश्तेदारों को इसे देखने के लिए बुलाया जाता है। कन्नड़ में इसे बोम्बे हब्बा, तमिल में बोम्मई कोलू, मलयालम में बोम्मा गुल्लू और तेलुगु में बोम्माला कोलुवु कहा जाता है।

कर्नाटक में नवरात्रि को दशहरा कहा जाता है, और मैसूर का दशहरा बहुत भव्य तरीके से मनाया जाता है। यहां मैसूर के शाही परिवार की जंबो सवारी के साथ राजकीय उत्सव होता है और मैसूर की परंपरा से जुड़ा गिफ्टिंग सेट भी इसी शाही विरासत की झलक दिखाता है। नौवें दिन यानी महानवमी को दक्षिण भारत के कई हिस्सों में आयुध पूजा (Ayudha Puja) की जाती है, जिसमें कृषि उपकरण, औजार, किताबें, वाद्य यंत्र और वाहनों को सजाकर उनकी पूजा की जाती है। इसी दिन देवी सरस्वती की भी पूजा होती है। दसवें दिन यानी विजयादशमी को केरल में विद्यारंभम मनाया जाता है, जिस दिन छोटे बच्चों को पढ़ाई-लिखाई की शुरुआत कराई जाती है।

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भारत के अलग-अलग हिस्सों में नवरात्रि, एक नजर में

क्षेत्र पहचान खास परंपरा
उत्तर भारत रामलीला और दशहरा रावण दहन, कन्या पूजन
पश्चिम भारत (गुजरात) गरबा-डांडिया घड़े के चारों ओर नृत्य, डांडिया रास
पूर्वी भारत (बंगाल) दुर्गा पूजा पंडाल, मूर्ति स्थापना, विसर्जन
दक्षिण भारत गोलू और दशहरा गोलू सजावट, आयुध पूजा, विद्यारंभम

स्कंद पुराण में दक्षिण भारत की नौ दुर्गाओं का जिक्र

आमतौर पर पूरे भारत में शैलपुत्री से सिद्धिदात्री तक की नवदुर्गा को ही पूजा जाता है, लेकिन स्कंद पुराण में दक्षिण भारत के संदर्भ में देवी के नौ अलग नामों का भी उल्लेख मिलता है, वनदुर्गा, शूलिनी, जातवेदा, शांति, शबरी, ज्वाला दुर्गा, लवणा दुर्गा, आसुरी दुर्गा और दीप दुर्गा। यह पौराणिक परंपरा उस क्षेत्रीय विविधता को दिखाती है, जो नवरात्रि को पूरे भारत में जोड़ती है, भले ही पूजा के नाम और तरीके अलग-अलग क्यों न हों।

कन्या पूजन क्यों और कब किया जाता है?

कन्या पूजन (Kanya Pujan) में छोटी उम्र की लड़कियों को देवी का रूप मानकर उनकी पूजा की जाती है। उनके पैर धोकर तिलक लगाया जाता है, भोजन कराया जाता है और उपहार में हल्दी-कुमकुम व चुनरी दी जाती है, जिसके लिए हल्दी-कुमकुम का तैयार पैक काम आ सकता है। ज्यादातर घरों में यह अष्टमी या नवमी के दिन किया जाता है। 2026 में यह दोनों तिथियां 19 अक्टूबर को साथ पड़ रही हैं, इसलिए सही समय अपने घर की परंपरा और पंचांग के अनुसार तय करना बेहतर रहेगा।

पूजा में अखंड ज्योत, धूप और अगरबत्ती का क्या महत्व है?

नवरात्रि में बहुत से घरों में नौ दिनों तक अखंड ज्योत (Akhand Jyot) जलाई जाती है। यह लगातार जलती हुई ज्योत देवी की शक्ति के हमेशा मौजूद रहने का प्रतीक मानी जाती है। इसके लिए शुद्ध घी और लंबे समय तक जलने वाली बत्ती का इस्तेमाल किया जाता है।

रोजाना की आरती में धूप और अगरबत्ती (Dhoop and Agarbatti) का भी खास स्थान है। इनकी खुशबू पूजा वाली जगह के वातावरण को शांत और पवित्र बनाती है। नवरात्रि में चंदन, गुलाब या लोबान जैसी पारंपरिक खुशबू आम इस्तेमाल में आती है। जो लोग हर दिन के लिए अलग खुशबू आजमाना चाहते हैं, वे छह तरह की सुगंध वाली सॉलिड धूप जैसे विकल्प भी देख सकते हैं। दशहरे और नवरात्रि से जुड़े अगरबत्ती, धूप और गिफ्टिंग के कई विकल्प नवरात्रि पूजा पैक में एक साथ मिल जाते हैं।

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विजयादशमी पर नवरात्रि का समापन कैसे होता है?

2026 में विजयादशमी (Vijayadashami) मंगलवार, 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी। उत्तर भारत में इस दिन रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाए जाते हैं। पूर्वी भारत में देवी दुर्गा की मूर्तियों का विसर्जन किया जाता है। दक्षिण भारत में इसी दिन विद्यारंभम और आयुध पूजा जैसी परंपराएं पूरी होती हैं। हर क्षेत्र में तरीका अलग है, लेकिन भावना एक जैसी है, बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न।

Frequently Asked Questions

शारदीय नवरात्रि 2026 में रविवार, 11 अक्टूबर से शुरू होकर सोमवार, 19 अक्टूबर तक चलेगी। इसके अगले दिन, मंगलवार 20 अक्टूबर को विजयादशमी (दशहरा) मनाई जाएगी।

2026 में घटस्थापना का मुहूर्त 11 अक्टूबर को सुबह करीब 6:20 बजे से 10:15 बजे तक है। सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:32 बजे तक का अभिजीत मुहूर्त भी शुभ माना जाता है। शहर के हिसाब से समय में थोड़ा अंतर हो सकता है।

नौ दिनों में क्रमशः माँ शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। इन नौ रूपों को मिलाकर नवदुर्गा कहा जाता है।

कन्या पूजन आमतौर पर अष्टमी या नवमी के दिन किया जाता है। इसमें छोटी लड़कियों को देवी का रूप मानकर उनकी पूजा की जाती है और उन्हें भोजन व उपहार दिए जाते हैं। 2026 में यह दोनों तिथियां 19 अक्टूबर को साथ पड़ रही हैं।

व्रत के दौरान अनाज, प्याज और लहसुन नहीं खाया जाता। इसकी जगह फल, दूध-दही, कुट्टू और सिंघाड़े के आटे से बनी चीजें, साबूदाना और सेंधा नमक का इस्तेमाल किया जाता है। सेहत से जुड़ी किसी समस्या में व्रत शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है।

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