धनतेरस (Dhanteras) : उसका महत्व तथा पूजन विधि

धनतेरस (Dhanteras) : उसका महत्व तथा पूजन विधि

October 26, 2024Cycle Care

हिन्दू मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस हिंदुओं का एक मत्वपूर्ण त्यौहार है। धनतेरस कार्तिक के महीने में कृष्णा पक्ष की त्रयोदशी तिथि को दिवाली से ठीक दो दिन पहले मनाया जाता है। हिन्दू शास्त्रों के मुताबिक इस दिन भगवान धन्वंतरि समुन्द्र मंथन के समय अमृत का कलश लेकर प्रकट हुए थे । तभी से इस दिन को धन तेरस के रूप में मनाया जाने लगा । और भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाने लगी । इस दिन से ही दिवाली की तैयारी शुरू हो जाती है । वैसे तो इस दिन माँ लक्ष्मी,  कुबेर की पूजा भी की जाती है । 

भगवान धन्वंतरि को स्वास्थ के स्वामी के रूप में जाना जाता है और माँ लक्ष्मी को धन और समृद्धि के लिए। यह भी मानते हैं कि आज के ही दिन मां लक्ष्मी और कुबेर जी की भी उत्पत्ति हुई थी। दोनों का सम्बंध धन व समृद्धि से है इसलिये भी इसे धनतेरस या धन त्रयोदशी कहा जाता है। इसलिए धन और अच्छे स्वास्थ के लिए धनतेरस का त्यौहार मनाया जाता है । 

धनतेरस पूजा के लिए कमल पर विराजमान माँ लक्ष्मी की सुनहरे रंग की मूर्ति

धनतेरस पूजा का सही समय और शुभ मुहूर्त

इस बार धनतेरस 6 नवंबर 2026 शुक्रवार के दिन मनाया जाएगा। त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 6 नवंबर को सुबह लगभग 9:30 बजे से होगी और इस तिथि की समाप्ति 7 नवंबर 2026 को सुबह लगभग 11:45 बजे होगी। धनतेरस पर खरीदारी का शुभ मुहूर्त 6 नवंबर को ही सुबह 9:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक रहेगा। और धनतेरस पूजा मुहूर्त का समय भी शुक्रवार को ही शाम 6:18 बजे से रात 8:10 बजे तक रहेगा।

धनतेरस पूजा में आवश्यक सामग्री

जैसा कि आपको बताया कि धनतेरस के दिन माँ लक्ष्मी , कुबेर और भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है इन तीनो की पूजा के विना यह त्यौहार पूरा नहीं होता है । वैसे ही पूजा के लिए इन सामिग्री का होना भी आवश्यक है।

धनतेरस तिलक और पूजा के लिए ओम शांति शुद्ध कुमकुम

धनतेरस पूजा विधि:

आज के समय में धन और अच्छा स्वस्थ सबसे ज्यादा जरुरी होता है तो आपको धनतेरस पर माँ लक्ष्मी और भगवान की पूजा करके उसकी कामना जरूर करनी चाहिए । आइये जानिए कैसे करे धनतेरस की पूजा 

भगवान धन्वंतरि की पूजा के चरणों के लिए श्री धन्वंतरि पूजा विधि पढ़ें।

  • धनतेरस के दिन सूर्य उदय होने से पहले जल्दी उठें और दिनचर्या के अनुसार स्नान आदि करें 
  • नये वस्त्र धारण करें 
  • मंदिर की साफ सफाई करके सूर्य भगवान को जल अर्पित करें 
  • और दिन भर माँ लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि का ध्यान करें 
  • शाम के समय मुहर्त पर पूजा शुरू करें 
  • घर के द्वार पर रंगोली बनाये और माता के चरण स्थापित करें 
दीयों से सजी रंगोली के बीच रंगसुगंध रंगोली पाउडर का पैक
  • एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर  माँ लक्ष्मी , कुबेर और भगवान धन्वंतरि की तस्वीर स्थापित करें 
  • 1 कटोरी गेहू लेकर चौकी पर भगवन के सामने रखें और उस पर घी का दीपक जलाये 
  • कुमकुम चन्दन का तिलक लगाए 
  • अब भगवान गणेश की पूजा करें लड्डू का भोग लगाये 
  • माँ लक्ष्मी को सिंदूर लगाकर श्रंगार अर्पित करे और भोग लगाये 
  • उसके बाद भगवन कुबेर का 108 बार ॐ कुबेराय नमः का जप करे हुए पूजन करें 
  • धनवंतरी स्तोत्र का पाठ भी करना चाहिए 
  • झाड़ू पर कुमकुम और मिठाई का प्रसाद चढ़ाकर पूजन करें 
  • अब सबकी आरती करे 
  • हाथ जोड़कर सुख समृद्धि और धन स्वस्थ की कामना करें 
धनतेरस झाड़ू पूजन के लिए ओम शांति पूजा झाड़ू

धनतेरस से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हिंदू मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसलिए धनतेरस को स्वास्थ्य, धन और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है।

धनतेरस पर मुख्य रूप से भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा की जाती है। भगवान गणेश की पूजा भी शुभ कार्य की शुरुआत के लिए की जाती है।

धनतेरस की पूजा के लिए भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की तस्वीर या मूर्ति, फूल, अक्षत, कुमकुम, हल्दी, मिट्टी के दीये, अगरबत्ती, धूपबत्ती, कपूर, घी, मिठाई, लाल कपड़ा और पूजा की चौकी जैसी सामग्री रखी जा सकती है।

सबसे पहले घर और पूजा स्थल की सफाई करें। इसके बाद लाल कपड़े से सजी चौकी पर देवी-देवताओं की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें। कुमकुम, अक्षत, फूल और मिठाई अर्पित करें, दीपक जलाएं और आरती करें। पूजा के दौरान परिवार की परंपराओं और शुभ मुहूर्त का ध्यान रखें।

धनतेरस पर सोना, चांदी और नए बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है। ब्लॉग में धनिया खरीदने और उसे माता लक्ष्मी के चरणों में अर्पित करने की परंपरा का भी उल्लेख है।

हिंदू मान्यताओं के अनुसार, भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन के दौरान अमृत कलश के साथ प्रकट हुए थे। उन्हें स्वास्थ्य और आयुर्वेद से जुड़ा देवता माना जाता है। इसलिए धनतेरस पर उनकी पूजा अच्छे स्वास्थ्य और कल्याण की कामना के लिए की जाती है।

Related Articles

More articles