अक्षय तृतीया पूजा, भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी की आराधना

अक्षय तृतीया का महत्व क्या है? जानें धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व

April 13, 2026Cycle Care

अक्षय तृतीया क्यों खास है? (Akshaya Tritiya Kyon Khaas Hai?)

हिंदू पंचांग में कुछ तिथियाँ इतनी पवित्र होती हैं कि उन पर किए गए हर शुभ कार्य का फल अनंत काल तक मिलता रहता है। अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya) ऐसी ही एक दुर्लभ तिथि है। "अक्षय" शब्द संस्कृत भाषा से आया है, जिसका अर्थ है, जो कभी क्षीण न हो, जो सदा बना रहे। इस दिन किए गए जप, तप, दान, हवन और पूजन का फल अक्षय यानी अविनाशी हो जाता है।

वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व आत्मिक उन्नति, धर्म, सेवा और सद्कर्म की कभी न समाप्त होने वाली परंपरा का स्मरण कराता है। हिंदू धर्म में विजया दशमी और युगादि के साथ अक्षय तृतीया उन तीन तिथियों में से एक है जिन पर बिना कोई मुहूर्त देखे हर शुभ कार्य किया जा सकता है।

अक्षय तृतीया 2026 (Akshaya Tritiya 2026) — तिथि और शुभ मुहूर्त

अक्षय तृतीया 2026 की तारीख: रविवार, 19 अप्रैल 2026

तृतीया तिथि प्रारंभ: 19 अप्रैल 2026, प्रातः 10:49 बजे

तृतीया तिथि समाप्त: 20 अप्रैल 2026, प्रातः 07:27 बजे

अक्षय तृतीया शुभ मुहूर्त (Akshaya Tritiya Shubh Muhurat) 2026

अक्षय तृतीया को "अबूझ मुहूर्त" (Abujh Muhurat) कहा जाता है, अर्थात पूरा दिन ही शुभ है। फिर भी, पंचांग के अनुसार कुछ विशेष समय अत्यंत फलदायी माने गए हैं:

पूजा का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त: प्रातः 10:49 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक (अवधि: 1 घंटा 32 मिनट)

सोना खरीदने का शुभ मुहूर्त: 19 अप्रैल 2026, प्रातः 10:49 बजे से 20 अप्रैल 2026, प्रातः 05:52 बजे तक

चोघड़िया के अनुसार शुभ समय:

  • प्रातः मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत): 10:49 AM से 12:21 PM तक

  • दोपहर मुहूर्त (शुभ): 02:58 PM से 04:40 PM तक

  • सायं मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर): 08:05 PM से 11:57 PM तक

इंदौर और मध्यप्रदेश के निवासियों के लिए प्रातः 10:49 बजे से 12:26 बजे तक का समय विशेष रूप से शुभ माना गया है।

यह वर्ष 2026 में अक्षय तृतीया रविवार को पड़ रही है, जो सूर्य देव की ऊर्जा और सफलता के प्रतीक के साथ इस तिथि की "अक्षय" ऊर्जा को और अधिक शक्तिशाली बनाती है।

अक्षय तृतीया का इतिहास (Akshaya Tritiya Ka Itihas) — पौराणिक कथाएं

अक्षय तृतीया का इतिहास (Akshaya Tritiya Ka Itihas) हजारों वर्ष पुराना है। पुराणों और शास्त्रों में इस तिथि से जुड़ी अनेक महत्वपूर्ण घटनाओं का वर्णन मिलता है:

1. त्रेतायुग का आरंभ (Treta Yuga Ka Aarambh)

हिंदू कालगणना के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन सत्ययुग का अंत और त्रेतायुग का प्रारंभ हुआ था। इसीलिए इसे "युगादि तिथि" भी कहा जाता है। यह संधिकाल का समय होता है और हिंदू धर्मशास्त्र में संधिकाल में की गई साधना का फल अनेक गुना मिलता है।

2. भगवान परशुराम की जयंती (Bhagwan Parshuram Jayanti)

स्कंद पुराण और भविष्य पुराण में उल्लेख है कि वैशाख शुक्ल तृतीया को रेणुका के गर्भ से भगवान विष्णु ने परशुराम रूप में जन्म लिया। यही कारण है कि इस दिन परशुराम जयंती भी मनाई जाती है।

3. माँ गंगा का पृथ्वी पर अवतरण (Maa Ganga Ka Avatarana)

भगीरथ की घोर तपस्या से प्रसन्न होकर माँ गंगा इसी दिन स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं, जिससे समस्त जीवों का उद्धार संभव हुआ।

4. अक्षय पात्र की प्राप्ति (Akshaya Patra Ki Prapti)

महाभारत काल में पांडवों के वनवास के दौरान, भगवान सूर्यदेव ने युधिष्ठिर को अक्षय पात्र प्रदान किया था। इस पात्र से कभी अन्न की कमी नहीं हुई और द्रौपदी इससे असंख्य लोगों का पेट भर सकती थीं।

5. सुदामा और कृष्ण का मिलन (Sudama Aur Krishna Ka Milan)

द्वारकाधीश श्रीकृष्ण ने अपने परम मित्र सुदामा की दरिद्रता का नाश इसी तिथि को किया था। भक्ति और मित्रता की यह कथा आज भी लोगों को प्रेरणा देती है।

6. तीन अवतारों का प्राकट्य

इस दिन भगवान विष्णु के हयग्रीव अवतार, परशुराम अवतार और नरनारायण अवतार का प्राकट्य हुआ। इस दिन ब्रह्मा और श्रीविष्णु, इन दो देवताओं का सम्मिलित तत्त्व पृथ्वी पर आता है, जिससे पृथ्वी की सात्विकता बढ़ जाती है।

अक्षय तृतीया का धार्मिक महत्व (Akshaya Tritiya Ka Dharmik Mahatva)

अक्षय तृतीया का धार्मिक महत्व (Akshaya Tritiya Ka Dharmik Mahatva) कई पहलुओं से समझा जा सकता है:

सर्वसिद्ध मुहूर्त: यह तिथि "अबूझ मुहूर्त" है। इस दिन बिना कोई पंचांग देखे विवाह, गृह प्रवेश, व्यापार आरंभ, वाहन खरीद जैसे सभी शुभ कार्य किए जा सकते हैं।

पितृ तर्पण का महत्व: पुराणों में लिखा है कि इस दिन पितरों को किया गया तर्पण और पिंडदान अक्षय फल प्रदान करता है। गंगा स्नान से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं।

दान का अक्षय फल: इस दिन दिए गए दान का कभी क्षय नहीं होता। जिन वस्तुओं का दान किया जाता है, मान्यता है कि वे अगले जन्म में भी प्राप्त होती हैं।

जैन धर्म में महत्व: जैन धर्म में भी अक्षय तृतीया का विशेष धार्मिक महत्व है। इस दिन भगवान ऋषभदेव (आदिनाथ) ने एक वर्ष के उपवास के बाद इक्षु (गन्ने) के रस से पारण किया था। इसीलिए इस दिन को "अक्षय तृतीया" कहते हैं।

विष्णु पूजन: यह तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है। भगवान विष्णु, जो सृष्टि के पालनकर्ता हैं, उनकी आराधना इस दिन विशेष फलदायी मानी जाती है।

अक्षय तृतीया क्यों मनाई जाती है? (Akshaya Tritiya Kyon Manai Jati Hai?)

अक्षय तृतीया क्यों मनाई जाती है (Akshaya Tritiya Kyon Manai Jati Hai), यह प्रश्न अनेक लोगों के मन में आता है। इसके पीछे कई कारण हैं:

पहला कारण यह है कि यह युगों के परिवर्तन की तिथि है। दूसरा कारण यह है कि इस दिन कई दिव्य घटनाएं घटित हुईं जैसे परशुराम जन्म, गंगावतरण और अक्षय पात्र की प्राप्ति। तीसरा कारण यह है कि यह संधिकाल है जब ब्रह्मांडीय ऊर्जा सबसे अधिक सक्रिय होती है। चौथा कारण यह है कि इस दिन किए गए दान, पुण्य और पूजन का फल अनंत गुना होकर मिलता है। पाँचवाँ कारण यह है कि ग्रीष्म ऋतु के आरंभ पर जल, सत्तू और शीतल वस्तुओं के दान से समाज सेवा का भी पर्व मनाया जाता है।

अक्षय तृतीया का आध्यात्मिक महत्व (Adhyatmik Mahatva)

अक्षय तृतीया केवल भौतिक समृद्धि का नहीं, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति का भी पर्व है। सनातन संस्था के अनुसार इस दिन ब्रह्मा एवं श्रीविष्णु, इन दो देवताओं का सम्मिलित तत्त्व पृथ्वी पर आने से वातावरण की सात्विकता में वृद्धि होती है। इस कालमहिमा के कारण पवित्र नदियों में स्नान, दान और धार्मिक कृत्य करने से अधिक आध्यात्मिक लाभ मिलते हैं।

आध्यात्मिक दृष्टि से यह दिन हमें याद दिलाता है कि जीवन में अच्छे कर्म ही सबसे बड़ी संपत्ति हैं। धन के साथ-साथ पुण्य भी कमाना चाहिए और दूसरों की सहायता करना सबसे बड़ा धर्म है।

अक्षय तृतीया पूजा विधि (Akshaya Tritiya Puja Vidhi)

अक्षय तृतीया पूजा विधि (Akshaya Tritiya Puja Vidhi) सरल लेकिन विधिपूर्वक की जाए तो अत्यंत फलदायी होती है:

1 — प्रातः काल तैयारी

ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। यदि संभव हो तो किसी पवित्र नदी या तीर्थ में स्नान करें। स्वच्छ वस्त्र धारण करें, पीले रंग के वस्त्र इस दिन विशेष शुभ माने जाते हैं।

2 — पूजा स्थान की तैयारी

एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। उस पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की फोटो या मूर्ति स्थापित करें। श्री गणेश का ध्यान करते हुए "ॐ गण गणपतये नमः" का उच्चारण करें।

3 — संकल्प लें

संकल्प लें: "मैं अक्षय तृतीया के पुण्य दिवस पर भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी की पूजा करता हूँ, जिससे मेरे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास हो।"

4 — पूजन विधि

कुमकुम व गोपी चंदन का तिलक लगाएं। देवी लक्ष्मी को कमल का फूल और भगवान विष्णु को पीले फूलों की माला अर्पित करें। रोली, चावल, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य अर्पित करें। जौ, गेहूं का सत्तू, ककड़ी और चने की दाल नैवेद्य में चढ़ाएं।

5 — मंत्र जाप

धन प्राप्ति के लिए देवी लक्ष्मी का मंत्र जपें: "ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नौ लक्ष्मी प्रचोदयात्।" श्री विष्णुसहस्त्रनाम स्तोत्र और विष्णु चालीसा का पाठ करें।

6 — आरती और दान

भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करें। पूजा के बाद जरूरतमंदों को अन्न, जल, वस्त्र और फल का दान करें।

7 — कलश पूजन

धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन बिना कलश के की गई पूजा अधूरी मानी जाती है। जल से भरे कलश की भी विधिपूर्वक पूजा करें।

अक्षय तृतीया पूजा के लिए नवीन पूजा घी — शुद्ध और पारंपरिक

पूजा सामग्री लिस्ट अक्षय तृतीया (Puja Samagri List Akshaya Tritiya)

अक्षय तृतीया की पूजा के लिए निम्नलिखित सामग्री लिस्ट (Puja Samagri List) तैयार रखें:

देवता स्थापना के लिए: भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और श्री गणेश की फोटो या मूर्ति, लाल या पीला आसन कपड़ा, तांबे या पीतल का कलश

पूजन सामग्री: रोली, कुमकुम, गोपी चंदन, अक्षत (चावल), हल्दी, सिंदूर

फूल और पत्ते: पीले फूल (भगवान विष्णु के लिए), कमल के फूल (माता लक्ष्मी के लिए), तुलसी दल, आम के पत्ते

दीप और धूप: घी का दीपक, धूपबत्ती या प्राकृतिक धूप, कपूर

नैवेद्य: जौ, गेहूं का सत्तू, चने की दाल, ककड़ी, मिठाई, फल, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)

दान सामग्री: जल से भरा मिट्टी का घड़ा, सत्तू, गुड़, खरबूजा, ककड़ी, छाता, पंखा, वस्त्र, नमक, चावल

अन्य: जनेऊ, सुपारी, पान के पत्ते, नारियल, दक्षिणा के लिए सिक्के

बांसुरी चंदन सॉलिड धूप — अक्षय तृतीया पूजा के लिए प्राकृतिक धूप

पूजा में धूप का महत्व (Puja Mein Dhoop Ka Mahatva)

पूजा में धूप का महत्व (Puja Mein Dhoop Ka Mahatva) अत्यंत गहरा है। हिंदू शास्त्रों के अनुसार, पूजा के दौरान वातावरण को शुद्ध करने और देवताओं को प्रसन्न करने के लिए प्राकृतिक पदार्थों से बनी धूप का उपयोग सबसे श्रेष्ठ माना जाता है।

धूप के आध्यात्मिक लाभ: धूप से निकलने वाला सुगंधित धुआं नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और वातावरण में सकारात्मकता का प्रसार होता है। घर में रोजाना धूप जलाने से सुख और शांति रहती है और लोग तनाव मुक्त महसूस करते हैं। धूप जलाने से कई वास्तु दोष भी दूर होते हैं। धूप बनाने में प्रयुक्त चंदन, जड़ी-बूटियों और छाल का संबंध विभिन्न ग्रहों से होता है, जिससे ग्रह दोष शांत होते हैं।

पारंपरिक धूप — दशांग धूप (Dashang Dhoop)

प्राचीन शास्त्रों में वर्णित दशांग धूप सबसे शुभ मानी जाती है। चंदन, कुष्ठ, नखल, राल, गुड़, शर्करा, नखगंध, जटामांसी सहित दस पदार्थों को समान मात्रा में मिलाकर बनाई गई इस धूप से पूजा करने पर विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

अक्षय तृतीया की पूजा के लिए बांसुरी चंदन सॉलिड धूप एक उत्तम विकल्प है जो प्राकृतिक चंदन से बनी है।

गुग्गुल और गुड़-घी की धूप

पारंपरिक रूप से गुग्गुल-कर्पूर से और गुड़-घी मिलाकर जलते कंडे पर रखकर धूप दी जाती है। जब देवताओं के लिए धूप दान करें, तब ब्रह्मा, विष्णु और महेश का ध्यान करें।

घर में सुगंधित Om Shanthi Premium Cup Sambrani जलाने से पूजा का वातावरण दिव्य और पवित्र बनता है।

Om Shanthi Premium Cup Sambrani — अक्षय तृतीया पूजा के लिए धूप कप

पूजा के लिए अगरबत्ती कौन सी अच्छी है? (Puja Ke Liye Agarbatti Kaun Si Achi Hai?)

पूजा के लिए अगरबत्ती कौन सी अच्छी है (Puja Ke Liye Agarbatti Kaun Si Achi Hai), यह प्रश्न अनेक भक्तों के मन में आता है। भारतीय परंपरा में धूप, दीप, यज्ञ-हवन और अगरबत्ती पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं।

सुगंधित और प्राकृतिक अगरबत्ती का महत्व

अगरबत्ती में "अगर-तगर" नामक औषधि होती है, जो हवन सामग्री में मिलाई जाने वाली सुगंधित जड़ी-बूटी है। इसे अग्नि में जलाने से जड़ और चेतन दोनों जागृत होते हैं। सुगंधित अगरबत्ती जलाने से घर में घर में सुख और समृद्धि आती है, नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और वातावरण शुद्ध होता है।

क्या ध्यान रखें

शास्त्रों में बांस की लकड़ी से बनी अगरबत्ती जलाने की मनाही है, क्योंकि बांस का उपयोग अर्थी निर्माण में होता है और बांस जलाने से वंश वृद्धि में बाधा आने की मान्यता है। इसलिए बांस-मुक्त (Bamboo Free) और प्राकृतिक सामग्री से बनी अगरबत्ती ही पूजा में उपयोग करनी चाहिए।

Cycle की अगरबत्ती

अगर आप अक्षय तृतीया की पूजा के लिए सुगंधित, शुद्ध और प्राकृतिक सामग्री से बनी अगरबत्ती की तलाश में हैं, तो Cycle की अगरबत्तियां एक विश्वसनीय विकल्प हैं। Cycle Brand भारत का एक प्रतिष्ठित नाम है जो दशकों से पूजा और आध्यात्मिक जरूरतों के लिए उच्च गुणवत्ता की सुगंधित अगरबत्तियां और धूप प्रदान कर रहा है। अक्षय तृतीया की पवित्र पूजा में चंदन, रोज़ या जैस्मिन जैसी सुगंध वाली प्राकृतिक अगरबत्ती से पूजन का वातावरण दिव्य और शांतिपूर्ण बन जाता है।

पूजा के लिए Cycle GoodLuck Agarbatti — रोज़, मोगरा और चंपा की सुगंध के साथ — एक लोकप्रिय और विश्वसनीय विकल्प है।

पूजा में कितनी अगरबत्ती जलाएं

धार्मिक विद्वानों के अनुसार पूजा में 2 अगरबत्ती जलाना शुभ माना जाता है। किसी धार्मिक कार्यक्रम या यज्ञ के समय 4 अगरबत्ती जला सकते हैं। ध्यान रखें कि अगरबत्ती टूटी हुई या गीली न हो और जलाने के बाद उसे फूंक मारकर नहीं बुझाना चाहिए।

Cycle GoodLuck Agarbatti — अक्षय तृतीया पूजा के लिए प्रीमियम अगरबत्ती

अक्षय तृतीया पर दान का महत्व (Daan Ka Mahatva)

इस दिन दान करने का विशेष महत्व है। जिन वस्तुओं का दान इस दिन किया जाता है, वे अगले जन्म में भी प्राप्त होती हैं:

अन्न दान: "अन्नदानम् परम् दानम्", अन्न को धार्मिक ग्रंथों में परब्रह्म कहा गया है। किसी भूखे को भोजन कराना साक्षात नारायण सेवा के समान है। गर्मी के मौसम में सत्तू, गुड़ और शीतल जल का दान विशेष महत्वपूर्ण है।

जल दान: मिट्टी के घड़े में जल भरकर दान करने से पितरों की आत्मा को तृप्ति मिलती है।

वस्त्र और छाता दान: निर्धनों को वस्त्र, छाता, पंखे और चप्पलें दान करना गर्मी में जीवनदायी सहायता है।

बजट अनुसार दान: अगर बड़ा दान संभव न हो तो जौ (Jau), ककड़ी, खरबूजा या नमक का भी दान किया जा सकता है। दान में भावना ही सबसे महत्वपूर्ण है।

अक्षय तृतीया पर क्या करें और क्या न करें

अक्षय तृतीया पर करने योग्य कार्य

इस दिन प्रातः जल्दी उठें और पवित्र स्नान करें। लक्ष्मीनारायण और कुबेर की पूजा करें। सोना, चांदी या कोई नई वस्तु खरीदें। विवाह, गृह प्रवेश, व्यापार आरंभ जैसे शुभ कार्य करें। दान-पुण्य करें और जरूरतमंदों की सेवा करें। तुलसी की पूजा करें, यह माँ लक्ष्मी का स्वरूप मानी जाती हैं।

अक्षय तृतीया पर न करें

इस दिन झगड़ा या विवाद न करें। किसी का अपमान न करें। नकारात्मक विचारों से दूर रहें। बांस से बनी अगरबत्ती न जलाएं।

अक्षय तृतीया पर सोना क्यों खरीदते हैं? (Sona Kyon Kharidte Hain?)

सोना देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। वैदिक काल से सोने को केवल धातु नहीं बल्कि माँ लक्ष्मी का साक्षात स्वरूप माना गया है। "अक्षय" तिथि होने के कारण इस दिन खरीदा गया सोना कभी क्षीण नहीं होता, यह परिवार में पीढ़ियों तक समृद्धि बनाए रखता है।

अगर सोना खरीदना संभव न हो तो चांदी, पीतल के बर्तन या जौ (Jau) खरीदना भी इस दिन बहुत शुभ माना जाता है।

निष्कर्ष

अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya) केवल एक धार्मिक तिथि नहीं है, यह जीवन दर्शन का एक संदेश है। यह दिन हमें सिखाता है कि अच्छे कर्म, सेवा, दान और भक्ति ही वास्तविक "अक्षय संपदा" हैं जो कभी नष्ट नहीं होती। अक्षय तृतीया 2026 पर 19 अप्रैल को जब आप माँ लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करें, घर में सुगंधित धूप या प्राकृतिक अगरबत्ती जलाएं, किसी जरूरतमंद को अन्न-जल का दान करें और कोई नया शुभ कार्य आरंभ करें, तो जानें कि आप एक ऐसी परंपरा का हिस्सा बन रहे हैं जो सत्ययुग से चली आ रही है।

पूजा में शुद्धता और भाव सबसे आवश्यक है। घर का वातावरण पवित्र रखें, अच्छी सुगंध वाली प्राकृतिक धूप या अगरबत्ती जलाएं, और मन में विश्वास रखें कि इस अक्षय तिथि पर आपके शुभ संकल्प अवश्य फलीभूत होंगे।

अक्षय तृतीया की हार्दिक शुभकामनाएं!

FAQs

प्रश्न 1: अक्षय तृतीया 2026 कब है और शुभ मुहूर्त क्या है?

अक्षय तृतीया 2026 (Akshaya Tritiya 2026) रविवार, 19 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी। तृतीया तिथि प्रातः 10:49 बजे से आरंभ होकर 20 अप्रैल की प्रातः 07:27 बजे तक रहेगी। पूजा का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त 19 अप्रैल, प्रातः 10:49 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक है। यह पूरा दिन "अबूझ मुहूर्त" होने के कारण हर शुभ कार्य के लिए उपयुक्त है।

प्रश्न 2: अक्षय तृतीया का क्या अर्थ है और यह क्यों मनाई जाती है?

"अक्षय" शब्द का अर्थ है जो कभी क्षीण न हो। वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को यह पर्व मनाया जाता है। इस दिन त्रेतायुग का आरंभ, परशुराम जन्म, गंगावतरण, अक्षय पात्र की प्राप्ति और सुदामा-कृष्ण मिलन जैसी पवित्र घटनाएं हुई थीं। इस दिन किए गए जप, तप, दान और पूजन का फल अक्षय यानी अविनाशी हो जाता है।

प्रश्न 3: अक्षय तृतीया पर किस भगवान की पूजा करनी चाहिए?

अक्षय तृतीया पर मुख्य रूप से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इसके अलावा धन के देवता कुबेर की भी पूजा इस दिन विशेष फलदायी होती है। भगवान परशुराम की जयंती होने के कारण उनका पूजन भी किया जाता है। घर में तुलसी की पूजा करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है क्योंकि तुलसी को माँ लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है।

प्रश्न 4: पूजा में धूपबत्ती अच्छी है या अगरबत्ती?

शास्त्रों में पूजा विधान में धूपबत्ती का उल्लेख प्राचीन काल से मिलता है। प्राकृतिक सामग्री जैसे चंदन, गुग्गुल, जड़ी-बूटियों से बनी धूपबत्ती पूजा के लिए श्रेष्ठ मानी जाती है। यदि अगरबत्ती जलाएं तो सुनिश्चित करें कि वह बांस-मुक्त (Bamboo Free) और प्राकृतिक सामग्री से बनी हो। सुगंधित अगरबत्ती के उपयोग से परिवार पर देवताओं की कृपा बनी रहती है और घर का वातावरण सकारात्मक और पवित्र बनता है।

प्रश्न 5: अक्षय तृतीया पर क्या दान करना चाहिए?

इस दिन अन्न, जल, वस्त्र, छाता, पंखे, खरबूजा, ककड़ी, सत्तू, गुड़, चावल और नमक का दान करना शुभ माना जाता है। गर्मी के मौसम में ठंडे जल से भरे मिट्टी के घड़े का दान विशेष रूप से पुण्यकारी है। सीमित बजट में जौ (Jau) या तिल का दान भी अत्यंत फलदायी है। दान की महत्ता भावना में है, मात्रा में नहीं।

 

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